युक्तियुक्तकरण पर 10 जून से पोल खोल रैली: शिक्षक साझा मंच की प्रेस कांफ्रेंस में विसंगतिपूर्ण युक्तियुक्तकरण के खिलाफ शिक्षकों की हुंकार” शिक्षक साझा मंच ने कहा, शिक्षा को दिशा दो, अन्याय नहीं सहेंगे




रायपुर, 7 जून 2025। छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग द्वारा जारी युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के खिलाफ “ शिक्षक साझा मंच छ. ग.” ने आज प्रेस क्लब रायपुर में पत्रकार वार्ता आयोजित कर सरकार से 2 अगस्त 2024 के निर्देशों को निरस्त कर पुनः 2008 के सेटअप के आधार पर युक्तियुक्तकरण की मांग की है। मंच की ओर से प्रांतीय संचालक संजय शर्मा , विकास राजपूत, वीरेंद्र दुबे, केदार जैन, मनीष मिश्रा,जाकेश साहू. विष्णु साहू,कृष्ण कुमार नवरंग ने इसे शिक्षकों, विद्यार्थियों और शिक्षा व्यवस्था के विरुद्ध बताया है तथा 10 जून से चरणबद्ध आंदोलन की भी घोषणा की है।

 शिक्षक साझा मंच के प्रेस वार्ता में प्रांतीय संचालक प्रदीप लहरे , प्रीतम कोसले, कमलदास मुरचले और शंकरलाल साहू ने स्पष्ट किया कि शासन उद्देश्य एकल शिक्षकीय और शिक्षक विहीन स्कूलों में शिक्षक उपलब्ध कराना है, लेकिन वर्तमान युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता, तर्क और संवेदनशीलता का अभाव है। इसमें विभागीय निर्देशों की अनेक विसंगतियों से शिक्षा की गुणवत्ता, शिक्षकों की गरिमा और विद्यालयीन संचालन व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

प्रांतीय संचालक राजनारायण द्विवेदी, भूपेंद्र गिलहरे, भूपेंद्र बनाफर, चेतन बघेल, गिरीश केसकार, प्रदीप पाण्डेय, सर्व शिक्षक साझा मंच के तरफ से 

प्रमुख आपत्तियां और विसंगतियां को सामने रखा 

मंच ने कहा कि 2021 से अब तक 30,000 से अधिक भर्तियां, 25,000 पदोन्नतियां, 10,000 स्थानांतरण और 8,000 प्रतिनियुक्तियां मनमानी और भाई-भतीजावाद के तहत बिना विषय और सेटअप के की गईं। अब इन्हीं त्रुटियों को सुधारने के नाम पर पुराने कर्मचारियों को “अतिशेष” कर हटाया जा रहा है, जबकि नई भर्ती वाले शिक्षकों को संरक्षण दिया जा रहा है। प्रांतीय संचालक लैलून भारद्वाज, विक्रम राय, धर्मदास बंजारे, अनिल टोप्पो ना आगे कहा की 

प्राथमिक शालाओं के सेटअप में 1 प्रधानपाठक और 2 शिक्षक का प्रावधान रखते हुए एक पद घटा दिया गया है, जिससे लगभग 20,000 शिक्षक अतिशेष घोषित हो सकते हैं। इसी तरह, पूर्व माध्यमिक शालाओं में भी विषय के आधार पर शिक्षकों को हटाया जा रहा है, जबकि पहले विषय बंधन हटाकर नियुक्ति दी गई थी।


सरकार के दावे बनाम शिक्षक संगठन के तथ्य:


 विभाग का दावा -कोई पद घटाया नहीं गया

मंच का प्रतिवाद - 2008 के सेट-अप के अनुसार दो-दो पद घटाए जा रहे

विभाग का दावा -गुणवत्ता सुधार हेतु प्रक्रिया 20,000 प्राथमिक 212 स्कूल शिक्षक विहीन लगभग 5000 स्कूल एकल शिक्षकीय 

मंच का प्रतिवाद -9,000 पूर्व माध्यमिक स्कूलों में शिक्षक संख्या घटेगी 20,000 से अधिक शिक्षक अतिशेष घोषित

विभाग का दावा -केवल युक्तियुक्तकरण किया, कोई स्कूल बंद नहीं

मंच का प्रतिवाद - 30,000 स्कूल मर्ज कर 10,463 बनाए, जिससे 20,000 स्कूलों का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा 

संजय शर्मा.विकास राजपूत. जाकेश साहू, विष्णु साहू ने काउंसलिंग प्रक्रिया में अनियमितताओ को सामने रखा जिसमे रायपुर सहित कई जिलों में अतिशेष शिक्षकों की सूची का प्रकाशन नहीं किया गया, सूचना रात में दी गई, दावा-आपत्ति का कोई अवसर नहीं दिया गया, और काउंसलिंग में शिक्षकों की वरिष्ठता तक की अनदेखी हुई। कुछ मामलों में जिन शालाओं से शिक्षक हटाए गए, उन्हीं में पद रिक्त दिखाकर नए शिक्षकों को पदस्थ किया गया।

शिक्षक साझा मंच की मुख्य मांगें:

2 अगस्त 2024 के युक्तियुक्तकरण निर्देशों की तत्काल समीक्षा।


2008 के सेटअप को बहाल करना।


समायोजन में पारदर्शिता, दावा-आपत्ति प्रक्रिया और वरिष्ठता के नियम लागू करना।


शिक्षक संगठन पदाधिकारियों को समायोजन से छूट।


विद्यालयों का एकीकरण रद्द करना।


शिक्षक विहीन विद्यालयों में प्राथमिकता से पदस्थापन।


आंदोलन का ऐलान:

10 जून को जिला स्तरीय पोल खोल रैली और कलेक्टर को ज्ञापन।


13 जून को संभागीय रैली और संयुक्त संचालक को ज्ञापन।


16 जून से शाला प्रवेशोत्सव का बहिष्कार।


संजय शर्मा, विकास राजपूत,मनीष मिश्रा, केदार जैन, वीरेंद्र दुबे,विष्णु साहू, जाकेश साहू प्रदीप लहरे, प्रीतम कोसले,मनीष मिश्रा,  शंकरलाल साहू, विक्रम राय, कमलदास मुरचले ने सरकार से मांग की कि शिक्षक संगठनों से चर्चा कर सर्वसम्मति से नीतिगत निर्णय लिया जाए। अन्यथा आंदोलन और तेज किया जाएगा।


युक्तियुक्तकरण की उक्त प्रक्रिया से पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था, विद्यार्थी, पालक और कर्मचारियों की व्यवस्था में सबसे बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है। इस प्रक्रिया में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है, किंतु संबंधित समितियों को सर्वाधिकार प्रदान कर दिया गया है तथा किसी भी स्तर पर जानकारियों को सार्वजनिक करने या दावा आपत्ति करने और उनके निराकरण की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके कारण निरंकुशता, भाई-भतीजावाद तथा भ्रष्टाचार की व्यापक आशंका है। विभाग की वर्तमान दुरवस्था का कारण भी यही है, किंतु इस पर लगाम लगाने की कोशिश भी नहीं की गई है।

प्राथमिक विद्यालय के न्यूनतम सेट-अप में प्रधान पाठक सहित 03 पदों के स्थान पर 02 पदों का प्रावधान किया गया है। 02 पदों से प्राथमिक शालाओं का समुचित संचालन अव्यवहारिक व असंभव है, जबकि इन शालाओं के साथ बालवाड़ी को भी संलग्न किया गया है। इस स्थिति में शिक्षा की गुणवत्ता के साथ ही बच्चों की सुरक्षा पर भी सवालिया निशान लगते हैं। प्राथमिक शालाओं के सेट-अप घटाने से भारी संख्या में सहायक शिक्षक अतिशेष होने जा रहे हैं, जिनकी पदस्थापना के लिए अन्यत्र विकल्प अत्यंत सीमित है, जिसके कारण भारी अव्यवस्था और असंतोष उत्पन्न होगा। कर्मचारियों के भयादोहन की भी आशंका है। प्राथमिक शालाओं में सेट-अप में पद रिक्त न होने के बावजूद नई भर्ती के तहत मनचाही पदस्थापनाएं की गई। युक्तियुक्तकरण के निर्देशानुसार परिवीक्षा अवधि में होने के कारण इन्हें अतिशेष नहीं माना जाएगा, बल्कि पूर्व से सेट-अप के अनुसार पदस्थ शिक्षकों को अतिशेष मानकर हटाया जाएगा। यह पूर्व से कार्यरत कर्मचारियों के प्रति अन्याय और विभागीय अधिकारियों की निरंकुशता और मिलीभगत को संरक्षण देना साबित होगा। जबकि नई भर्ती व पदोन्नति की पदस्थापनाएं शिक्षक विहीन व एकल शिक्षकीय शालाओं में करके समाधान किया जा सकता था।

पूर्व माध्यमिक शालाओं में विषय बंधन को समाप्त कर भर्ती की गई तथा भर्ती व पदोन्नति की पदस्थापनाएं और उनमें मनचाहा संशोधन सेट-अप व विषय को दरकिनार किया गया। युक्तियुक्तकरण में पुनः पूर्व माध्यमिक विद्यालय में विषय के अनुसार सेट-अप लागू किया जा रहा है, जिसके कारण अधिकांश शालाओं के शिक्षक प्रभावित होने जा रहे हैं। अन्यत्र विकल्पों के अभाव में अव्यवस्था व भयादोहन के कारण निरंकुशता और भ्रष्टाचार की आशंका भी है। पूर्व माध्यमिक शालाओं में सेट-अप में पद रिक्त न होने और संबंधित विषय के पद न होने के बावजूद नई भर्ती व पदोन्नति और उनमें संशोधन के तहत मनचाही पदस्थापनाएं की गई। युक्तियुक्तकरण के निर्देशानुसार परिवीक्षा अवधि में होने के कारण इन्हें अतिशेष नहीं माना जाएगा, बल्कि पूर्व से सेट-अप के अनुसार पदस्थ शिक्षकों को अतिशेष मानकर हटाया जाएगा। यह पूर्व से कार्यरत कर्मचारियों के प्रति अन्याय और विभागीय अधिकारियों की निरंकुशता और मिलीभगत को संरक्षण देना साबित होगा। जबकि नई भर्ती व पदोन्नति की पदस्थापनाएं शिक्षक विहीन, एकल शिक्षकीय और विषय की आवश्यकता अनुसार शालाओं में करके समाधान किया जा सकता था।

वर्तमान शाला में समान पदस्थापना/कार्यभार ग्रहण दिनांक होने की स्थिति में पद पर प्रथम नियुक्ति तिथि या आयु के आधार पर वरिष्ठ मानने का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

पूर्व माध्यमिक शालाओं में पूर्व में विषय के उल्लेख के बिना पदस्थापनाएं हुई हैं तथा अध्यापन विषय का पूर्व में विकल्प भी दिया गया था। पूर्व में गणित व जीवविज्ञान स्नातकों को विज्ञान समूह के शिक्षक के रूप में नियुक्ति दी गई है, किंतु वर्तमान निर्देश अपर्याप्त व अस्पष्ट है, जिसके कारण भाई-भतीजावाद होने की प्रबल आशंका है।

बस्तर संभाग में सैकड़ों की संख्या में पोटा केबिन संचालित हैं, जिसमें हजारों असुविधाग्रस्त व हिंसा प्रभावित बच्चे पढ़ते हैं, किंतु आज तक इन पोटा केबिन के लिए विभागीय सेट-अप स्वीकृत नहीं किया गया है। युक्तियुक्तकरण से इनके अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।

हाईस्कूल व हायर सेकेंडरी स्कूल में विषयवार सेट-अप लागू है। युक्तियुक्तकरण के तहत कालखंड की संख्या के आधार पर अतिशेष खोजने की अनुचित कवायद की जा रही है, जबकि विभिन्न कक्षाओं में सेक्शन के आधार पर अधिक पदों की स्वीकृति आवश्यक है। सेट-अप के अनुरूप पदस्थापनाएं न होना विभागीय निरंकुशता व भाई-भतीजावाद का परिणाम है

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